वो आवाज़ जो अब तक सुनाई देती है

मजाज़ की मक़बूलियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि फ़िरंगी महल के हयातुल्लाह अंसारी और एक और नौजवान रज़ा अंसारी भी उन लोगों में शामिल थे…

Admin Admin

हर सुखन इस का इक मक़ाम से है

वीरेनियत के आयोजक कहते हैं कि वीरेनियत एक ‘कविता समारोह नहीं कविता है’। इस कार्यक्रम को नजदीक से महसूस कर वाक़ई ऐसा लगता है कि यह कविता है, समारोह नहीं।

Admin Admin

चंद्रमोहन की कविताएँ

क्या हिन्दी में श्रम की स्वानुभूति की कविताएँ भी संभव हैं? अगर हाँ तो उनका रंग श्रम के प्रति सहानुभूति के भाव से लिखी गई कविताओं से किस हद तक…

Admin Admin

मधु कांकरिया की कहानी : वह भी अपना देश है

वे ढाका के अनमने से दिन थे। बंद दरवाज़े-सा बंद जीवन। न कोई दस्तक, न कोई पुकार। सुबह थोड़ी कम सुबह होती। उसका मिज़ाज ग़ायब रहता। दोपहर बहुत ज़्यादा दोपहर…

Admin Admin

बुलडोज़र गाथा

‘हमारे लोकतंत्र के साथ जो गड़बड़ी है, बुलडोज़र उसका एक अभिलक्षण है। अदालत ने आख़िरकार भौतिक बुलडोज़र पर ग़ौर फ़रमाया है और इसके ग़ैर-क़ानूनी इस्तेमाल को रोकने की कोशिश की…

‘आलोचना’ त्रैमासिकी के अंक-75 पर एक नज़र

'आलोचना' त्रैमासिकी के अंक-75 में ‘कफ़न’ संबंधी बहस को युवा शोधार्थी अदिति भारद्वाज ने आगे बढ़ाया है। बहस में उठे कई बिंदुओं पर विस्तृत राय रखने के अलावा उनके लेख…

नेहरू, ‘पैसिव रिवोल्यूशन’ और ‘इंडियन आइडियोलॉजी’

आधुनिकता को आधुनिकीकरण से अलग करके देखना ज़रूरी है। आधुनिकता में अन्वेषण बहुत ही महत्त्वपूर्ण अंग है। यहाँ पर किसी भी तरह की “मान्यता” की जगह नहीं होती है। आधुनिकता…

धनंजय राय धनंजय राय

योगेन्द्र आहूजा की कहानी : डॉक्टर जिवागो

एक बार नहीं, दो-तीन बार आया था फ़ोन, मगर मैं अपनी इंटर्नशिप में गले-गले तक डूबा था। एक-एक मिनट का टोटा था। सुबह उठते ही अपने खड़खड़िया स्कूटर पर अपना…

Admin Admin

साहित्य में संयुक्त मोर्चा?

मेरा विचार है कि ‘साहित्य में संयुक्त मोर्चा’ केवल कुछ दोस्तों के कृत्रिम उत्साह प्रदर्शन और खयाली पुलाव पकाने से नहीं बनेगा, न वस्तुस्थिति से आँखें मींचकर हथेली पर सरसों…

हरे प्रकाश उपाध्याय की कविताएँ

हरे प्रकाश उपाध्याय एक लंबे समय के बाद इस समाज की सच्चाइयाँ अपनी कविताओं में लेकर आए हैं। ये कविताएँ मजदूरों की कविताएँ हैं। ऐसी कविताएँ इन दिनों चलन के…

Admin Admin