


महाश्वेता के आदिवासी कथा-साहित्य में अतीत से वर्तमान तक पसरी गरीबी, बदहाली, बंधुआगिरी, अपराधी-सा गरिमाविहीन जीवन और उनकी सत्ता द्वारा निरन्तर उन्मूलन की कोशिश साफ़-साफ़ नज़र आती है। आधुनिकता के लिखित शब्द-कानून आदिवासियों के लिए हिंसा के स्रोत के रूप में बार-बार रेखांकित होते हैं। महाश्वेता की यह अवधारणा सच साबित हुई है कि जेलखाने, पुलिस थाने, बंधुआगिरी और विकास परियोजनाएँ ये सभी आदिवासियों के पूर्ण उन्मूलन में लगी हैं।