


अगर पर्दे पर हमारे आदर्शों का मूर्ति-भंजन किया जाए, तो मुझे यह सब देखकर भी ख़ुशी होगी। मेरा मतलब है कि राम और अन्य आदर्शों के पाखंड रेखांकित किए जाएँ और उन्हें उनके सही रंग में दिखाया जाए। पुराणादि की हमारी जितनी कहानियाँ हैं, उन्हें आधुनिक शोध के आलोक और सच्चे ऐतिहासिक संदर्भ में रखकर जाँचने और संशोधन करने की ज़रूरत है।